“सोचिए… क्योंकि आप साधारण नहीं हैं” मित्रों, आज मैं आपसे कोई भारी बात करने नहीं आया हूँ। आज मैं आपको डराने या झकझोरने नहीं आया हूँ। आज मैं आपसे एक बहुत सुंदर, बहुत सकारात्मक बात करने आया हूँ। और वो बात यह है— आप साधारण नहीं हैं। मैं आपसे एक सवाल पूछता हूँ। क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि आपके भीतर कुछ और करने की क्षमता है, कुछ और बनने की संभावना है, लेकिन रोज़मर्रा की भागदौड़ में वो बात कहीं दब जाती है? अगर हाँ, तो इसका मतलब है कि आप जाग रहे हैं। और जो जाग रहा होता है, वही आगे बढ़ता है। कुछ समय पहले एक महान चिकित्सक और नोबेल पुरस्कार विजेता से एक पत्रकार ने पूछा— “आज के मनुष्य के साथ सबसे बड़ी समस्या क्या है?” उन्होंने मुस्कुराकर बहुत शांति से कहा— “मनुष्य सोचता नहीं है।” अब मित्रों, इसे नकारात्मक मत समझिए। मैं इसे एक अवसर की तरह देखता हूँ। क्योंकि अगर समस्या यह है कि मनुष्य सोचता नहीं है, तो समाधान बहुत सरल है— सोचना शुरू कीजिए। और यह कोई नई बात नहीं है। हमारी सनातन परंपरा हज़ारों साल पहले यह सत्य हमें दे चुकी है। वेद कहते हैं— “यथा भावना तथा भवति।” ज...
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